9 अप्रैल 2020 - 13:47
सऊदी अरब में कोरोना का तूफान और उस तूफान पर बिन सलमान की सवारी... सऊदी अरब में कोरोना का हैरतअंगेज़ इस्तेमाल ... बड़े बदलाव की आ

सऊदी अरब में कोरोना का प्रवेश हो चुका है और उसके बाद कोरोना के नाम पर बड़े बड़े फैसले किये जा रहे हैं और बड़े बड़े क़दम उठाए जा रहे हैं।

सऊदी अरब में कर्फ्यू के अलावा यूएई कुवैत और बहरैन के साथ ज़मीनी सीमाओं को  भी बंद कर दिया गया है, स्कूलों और यूनिवर्सिटियों को बंद कर दिया है। इन हालात में बहुत से टीकाकार कुछ और ही आशंका प्रकट कर रहे हैं। टीकाकारों का मानना है कि बिन सलमान कोरोना की आड़ में बहुत कुछ कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि बिन सलमान, कोरोना से मुक़ाबले के नाम पर बड़े पैमाने पर शाही खानदान में अपने विरोधियों को पकड़वा रहे हैं।

    मार्च के आरंभ में सऊदी अरब में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई थीं गिरफ्तार होने वालों में सऊदी नरेश के भाई भी थे इन सब पर विदेशियोंसे संपर्क और विद्रोह की तैयारी का आरोप था। सब को मालूम है कि यह सारे आरोप, दर अस्ल इन लोगों को राह से हटाने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस की चाल है। इन गिरफ्तारियों  से क्राउन प्रिंस ने यह संदेश दिया था कि सऊदी अरब में बिन सलमान के खिलाफ बोलने का कोई साहस नहीं कर सकता और अगर यह साहस किया किसी ने तो फिर गिरफ्तारी उसका भाग्य होगी। 

अब लोगों का कहना है कि सऊदी अरब में कोरोना ने क्राउन प्रिंस बिन सलमान को सुनहरा मौका दे दिया है और वह रियाज़ पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए कोरोना को हथियार के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं।

    सऊदी अरब में बिन सलमान के विरोधी साफ साफ कह रहे हैं कि बिन सलमान कोरोना के बहाने अपने विरोधियों को मैदान से हटा रहे हैं और विरोधियों को आइसोलेशन में डाल कर उनकी गतिविधियां खत्म कर रहे हैं।

    विरोधियों के इन आरोपों को इस बात से भी बल मिलता है कि सऊदी अरब के " न्यूम " नगर में एक क्षेत्र को शाही परिवार के लोगों के लिए विशेष कर दिया गया है। यह आधुनिक नगर लाल सागर के तट पर स्थित है। सरकारी तौर पर यह कहा जा रहा है कि यह क्षेत्र, कोरोना से संदिग्ध शाही परिवार के लोगों के लिए है विशेष कर अधिक आयु वाले सदस्यों के लिए। यह क्षेत्र रियाज़ से काफी दूर है और बिन सलमान जिसे चाहें कोरोना के नाम पर इस क्षेत्र में क़ैद कर सकते हैं।

     कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि बिन सलमान कोरोना वायरस की आंधी से फैली अफरा तफरी में जो कुछ कर रहे हैं वह वास्तव में सत्ता पर कब्ज़ा जमाने की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित करने का प्रयास है। इस तरह की आशंका अब पश्चिमी मीडिया में प्रकट की जा रही है।

    जानकार सूत्र बताते हैं कि बिन सलमान एक बयान जारी करके अपने पिता के त्यागपत्र की घोषणा कर सकते हैं जिसके बाद वह स्वंय को सऊदी अरब का नरेश घोषित कर देंगे इसके लिए सऊदी अरब में हाई अलर्ट होना ज़रूरी था और अब सऊदी अरब में कर्फ्यू लग चुका है।

 दर अस्ल बिन सलमान को  यह डर है कि अगर अमरीका में ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव में विजयी नहीं हुए तो फिर उनकी राह में बड़ी रुकावट पैदा हो जाएगी और वहां के नये राष्ट्रपति को इतने बड़े समर्थन के लिए बड़ा तोहफा देना पड़ेगा और ट्रम्प पर की गयी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।

    इस लिए बहुत से लोगों का ख्याल है कि बिन सलमान वाइट हाउस में ट्रम्प की उपस्थिति के दौरान ही सऊदी अरब में सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाना चाहते हैं और इसके लिए कोरोना सब से अधिक उन की मदद कर रहा है। एक तो दुनिया भर में सब लोग कोरोना में व्यस्त हैं दूसरे सऊदी अरब में भी कोरोना की वजह से जो चाहें वह कर सकते हैं इस लिए अब उनके लिए उचित समय हो सकता है अपनी पुरानी इच्छा पूरी करने का।  यही वजह है कि बहुत से लोग अब यह कह रहे हैं कि एक से दो महीने के भीतर सऊदी अरब में बड़ा बदलाव हो सकता है।

    कोरोना ने पूरी दुनिया को संकट में डाल रखा है लेकिन सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के लिए यह एक अवसर है। उन्होंने कोरोना के बहाने खाशुकजी की हत्या के बाद पैदा होने वाले तनाव को दूर करके युरोपीय देशों से संबंध भी मधुर बना लिये हैं जबकि कोरोना से पहले तक अधिकांश युरोपीय नेता, बिन सलमान से बात करने से भी कतराने लगे थे।    जब से पत्रकार जमाल खाशुकजी की हत्या हुई थी और बिन सलमान की भूमिका खुल कर सामने आ गयी थी सऊदी अरब यह कलंक के दाग को धोने के लिए करोड़ों डालर खर्च कर रहा था, सऊदी अरब को  यह भी डर सताने लगा था कि कहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ कोई फैसला न कर लिया जाए मगर कोरोना ने सब कुछ खत्म कर दिया, बिन सलमान के मन से किसी कार्यवाही के डर को भी। इस लिए जब पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने मे व्यस्त है सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एक बार फिर पूरी ताक़त से सऊदी अरब के राज सिहांसन पर क़ब्ज़े की ओर बढ़ रहे हैं।